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  • भारत-ऑस्ट्रेलिया में हुआ बड़ा रक्षा करार: राजनाथ सिंह ने बताया दोनों देशों की दोस्ती का असली राज

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    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी अब एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। शुक्रवार को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के असिस्टेंट डिफेंस मिनिस्टर पीटर खलील के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक ने दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में निर्णायक कदम रखा। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ी हुई हैं।

    राजनाथ सिंह ने इस मुलाकात को “दो लोकतांत्रिक मित्र देशों के बीच भरोसे और पारस्परिक सम्मान पर आधारित साझेदारी” बताया। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत संबंध तीन प्रमुख स्तंभों पर टिके हैं — सरकारों के बीच सहयोग, जनता के बीच घनिष्ठ संबंध और व्यावसायिक हितों का मेल। इन तीन स्तंभों ने दोनों देशों की दोस्ती को न केवल रणनीतिक मजबूती दी है बल्कि सांस्कृतिक गहराई भी प्रदान की है।

    बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा उत्पादन, अनुसंधान, समुद्री सुरक्षा, और साइबर सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है और इस दिशा में ऑस्ट्रेलिया के साथ साझेदारी भारत की तकनीकी क्षमता को नई दिशा देगी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को आमंत्रित किया कि वह भारत के रक्षा औद्योगिक गलियारे में निवेश करे और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं में भाग ले।

    ऑस्ट्रेलिया के असिस्टेंट डिफेंस मिनिस्टर पीटर खलील ने भारत की तकनीकी प्रगति और रक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज वैश्विक सुरक्षा ढांचे का एक अहम स्तंभ बन चुका है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका निर्णायक है और ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ मिलकर इस क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए काम करना चाहता है।

    दोनों देशों ने रक्षा अभ्यासों को और अधिक व्यापक बनाने का भी निर्णय लिया है। आने वाले महीनों में “AUSINDEX” और “Malabar” नौसैनिक अभ्यासों में दोनों देशों की नौसेनाएं संयुक्त रूप से भाग लेंगी। इसके अलावा, आर्मी और एयर फोर्स स्तर पर भी नए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने पर सहमति बनी है। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और आपसी समझ विकसित होगी।

    बैठक में यह भी तय किया गया कि दोनों देश समुद्री निगरानी और आपदा प्रबंधन में सहयोग को और गहराई देंगे। हिंद महासागर में संयुक्त गश्त, सूचनाओं का आदान-प्रदान, और समुद्री डकैती या अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। इस दिशा में दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच एक संयुक्त कार्यबल (Joint Working Group) गठित करने की घोषणा भी की गई है।

    राजनाथ सिंह ने बैठक के दौरान कहा, “भारत और ऑस्ट्रेलिया केवल रणनीतिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि मूल्य आधारित सहयोगी भी हैं। हम दोनों लोकतंत्र, स्वतंत्रता और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास करते हैं। यही हमारी दोस्ती की असली ताकत है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया के संबंध एक वैश्विक उदाहरण बनेंगे कि कैसे दो समान विचारधारा वाले देश साझेदारी के माध्यम से क्षेत्रीय और वैश्विक शांति सुनिश्चित कर सकते हैं।

    पीटर खलील ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी सिर्फ सुरक्षा या रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, व्यापार, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में भी नई ऊर्जा ला रही है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ मिलकर नई रक्षा तकनीक विकसित करने, समुद्री सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    बैठक के बाद दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया “मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र” के लिए मिलकर काम करेंगे। इस बयान में यह भी कहा गया कि दोनों देश किसी भी प्रकार के विस्तारवादी रवैये या जबरन कब्जे के खिलाफ खड़े हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन के पक्षधर हैं।

    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह करार भारत के लिए एक रणनीतिक जीत साबित होगा। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में क्वाड (QUAD) देशों — अमेरिका, जापान, और ऑस्ट्रेलिया — के साथ अपने संबंधों को जिस तरह से मजबूत किया है, यह उसी श्रृंखला का हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया के साथ यह समझौता भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक और मजबूत रणनीतिक सहयोगी देता है।

    इसके अलावा, यह करार भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की नीति को भी बल देगा। ऑस्ट्रेलिया के पास अत्याधुनिक रक्षा तकनीक और समुद्री युद्ध प्रणालियों का अनुभव है, जबकि भारत के पास विशाल मानव संसाधन और विनिर्माण क्षमता है। दोनों के मेल से रक्षा उद्योग में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

    राजनाथ सिंह ने अंत में कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यह संबंध केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक नई दिशा तय करेगा। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ रक्षा करार नहीं, बल्कि भरोसे और साझा विजन पर आधारित एक स्थायी साझेदारी है।”

    इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच अगले वर्ष एक उच्चस्तरीय रक्षा संवाद (Defence Dialogue) आयोजित करने की भी घोषणा की गई। इसमें न केवल रक्षा मंत्री, बल्कि तीनों सेनाओं के प्रमुख भी शामिल होंगे। इससे यह स्पष्ट है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया अब एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जहां उनकी रणनीतिक साझेदारी न केवल द्विपक्षीय हितों को बल्कि वैश्विक शांति को भी आकार देगी।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ यह रक्षा करार केवल दो देशों के बीच औपचारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी रणनीतिक दोस्ती की कहानी है जो लोकतांत्रिक मूल्यों, पारस्परिक सहयोग और वैश्विक शांति की भावना पर आधारित है। राजनाथ सिंह और पीटर खलील की बैठक ने यह साबित कर दिया है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और विकास की दिशा में नया इतिहास रचने के लिए तैयार हैं।

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