• Create News
  • ▶ Play Radio
  • भारत-यूके रिश्तों में नया अध्याय: तीन बड़ी रक्षा डील और भगोड़ों पर एक्शन से गेमचेंजर बना कीर स्टार्मर का भारत दौरा

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की भारत यात्रा को भारत-यूके संबंधों के इतिहास में एक नया अध्याय कहा जा रहा है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच तीन बड़ी रक्षा डील, टेक्नोलॉजी साझेदारी, ट्रेड समझौते और भगोड़ों पर संयुक्त कार्रवाई की रूपरेखा जैसे कई अहम निर्णय लिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम स्टार्मर की यह मुलाकात न सिर्फ कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इसने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नए युग में प्रवेश दिलाया है।

    ब्रिटेन और भारत के बीच हुई पहली बड़ी डील लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल सिस्टम (Lightweight Multirole Missiles) को लेकर रही, जिसकी कीमत करीब 468 मिलियन डॉलर (लगभग 3.5 हजार करोड़ रुपये) बताई जा रही है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन भारत को अत्याधुनिक मिसाइल तकनीक उपलब्ध कराएगा, जो भारतीय नौसेना और वायुसेना की शक्ति में गुणात्मक वृद्धि करेगी। इससे भारत की रक्षा क्षमताओं को एक नई दिशा मिलेगी और ब्रिटेन के रक्षा उद्योगों को भी एक मजबूत निर्यात बाजार प्राप्त होगा।

    दूसरी बड़ी डील इलेक्ट्रिक प्रपल्शन टेक्नोलॉजी से जुड़ी रही, जिसके तहत दोनों देश भविष्य के नौसैनिक जहाजों के लिए पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक प्रणोदन प्रणाली विकसित करेंगे। यह कदम “मेक इन इंडिया” पहल के अनुरूप है और भारत में रक्षा उत्पादन के स्थानीयकरण को प्रोत्साहित करेगा। दोनों देशों की कंपनियां मिलकर को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन मॉडल पर काम करेंगी, जिससे रोजगार के अवसर और तकनीकी सहयोग दोनों को बल मिलेगा।

    तीसरी अहम पहल Vision 2035 रोडमैप से संबंधित रही। इस दस्तावेज़ के तहत भारत और ब्रिटेन ने आने वाले दशक के लिए रक्षा, साइबर सुरक्षा, शिक्षा, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में साझा सहयोग को औपचारिक रूप से मंजूरी दी। इस रोडमैप में रक्षा औद्योगिक सहयोग, उन्नत सैन्य तकनीक के संयुक्त विकास, सेमीकंडक्टर रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी और समुद्री सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं। यह रोडमैप न केवल दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत का भी प्रतीक है।

    दौरे का एक और बड़ा पहलू आर्थिक अपराधियों और भगोड़ों पर एक्शन प्लान रहा। भारत और ब्रिटेन ने यह सहमति जताई कि वे एक साझा कानूनी ढांचा तैयार करेंगे, ताकि लंबे समय से चल रहे प्रत्यर्पण मामलों को तेजी से निपटाया जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी अब अस्वीकार्य है, और दोनों देशों के बीच कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सहयोग बढ़ाना समय की आवश्यकता है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने भी इस दिशा में सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया के तहत दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत की कूटनीतिक सफलता का उदाहरण है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जापान जैसे देशों के साथ जो रक्षा साझेदारियां बनाई थीं, उनमें अब ब्रिटेन का नाम भी मजबूती से जुड़ गया है। यह कदम भारत के लिए “मेक इन इंडिया डिफेंस विजन” को और गति देगा।

    इस दौरे के दौरान दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र के अलावा व्यापार और तकनीक में भी अहम कदम उठाए। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की बात कही। इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच वस्त्र, दवा, ऑटोमोबाइल और टेक सेक्टर में व्यापार बढ़ेगा। साथ ही भारत को यूरोपीय बाजारों तक आसान पहुंच मिलेगी।

    ब्रिटेन की ओर से प्रधानमंत्री स्टार्मर ने भारतीय उद्योगपतियों और रक्षा क्षेत्र के अधिकारियों के साथ भी बैठक की। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन भारत को “विश्वसनीय तकनीकी साझेदार” मानता है और दोनों देशों के बीच सहयोग से रक्षा उत्पादन, साइबर सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।

    कूटनीतिक स्तर पर भी इस यात्रा ने भारत को एक मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है। स्टार्मर की यात्रा ऐसे समय में हुई जब वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और ब्रिटेन ब्रेक्जिट के बाद नए आर्थिक अवसरों की तलाश में है। ऐसे में भारत दोनों देशों के हितों को जोड़ने वाला स्वाभाविक साझेदार बनकर उभरा है।

    भारत-यूके के रिश्ते अब केवल औपचारिक साझेदारी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह एक रणनीतिक और प्रौद्योगिकीय सहयोग में परिवर्तित हो चुके हैं। रक्षा सौदे, टेक्नोलॉजी सहयोग, और भगोड़ों पर एक्शन की सहमति ने इस दौरे को ऐतिहासिक बना दिया है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी भारत की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रभाव दोनों को और मजबूत करेगी।

    ब्रिटिश पीएम की यह यात्रा साबित करती है कि भारत अब केवल रक्षा सौदों का बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा और तकनीकी पारिस्थितिकी का एक अहम केंद्र बन चुका है। इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि कीर स्टार्मर का भारत दौरा वास्तव में एक गेमचेंजर साबित हुआ है, जिसने भारत-यूके संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।

  • Related Posts

    राजस्थान जालोर के छोटे से गांव से राष्ट्रीय तकनीकी ब्रांड तक का सफर, भंवर सुथार ने आस्थासॉफ्ट टेक्नोलॉजीज़ के माध्यम से रचा सफलता का नया इतिहास

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। भारत के तेजी से विकसित हो रहे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और वित्तीय प्रौद्योगिकी (FinTech) क्षेत्र में आस्थासॉफ्ट टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड…

    Continue reading
    शरद पवार और सुप्रिया सुले ने की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात, एनडीए में समर्थन की चर्चाओं के बीच सियासी हलचल तेज

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *