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विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी और फर्जीवाड़े के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है। मोदी सरकार ने 1983 के इमिग्रेशन एक्ट को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का उद्देश्य ऐसे कानून बनाना है जो न केवल आधुनिक परिस्थितियों के अनुरूप हों, बल्कि विदेश में काम करने जाने वाले भारतीय नागरिकों को हर स्तर पर सुरक्षा प्रदान करें।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, नया इमिग्रेशन कानून पुराने एक्ट की जगह लेगा और इसमें प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, पारदर्शिता, रोजगार एजेंटों की जवाबदेही, और डिजिटल निगरानी पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही, विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी वादे करने वाले एजेंटों और दलालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
भारत से हर साल लाखों लोग खाड़ी देशों, एशिया और यूरोप के विभिन्न हिस्सों में रोजगार के अवसर तलाशने के लिए जाते हैं। इनमें से कई लोग अनजान एजेंटों के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई गवां बैठते हैं। कई बार तो फर्जी एजेंसियां पासपोर्ट और दस्तावेज तक लेकर फरार हो जाती हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए सरकार का यह नया कानून महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
नए कानून के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल होंगे —
हालांकि सरकार ने आधिकारिक रूप से बिल का ड्राफ्ट जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नए कानून में कई सख्त प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। इनमें विदेशी नौकरी के लिए लाइसेंस प्राप्त एजेंटों का सेंट्रल डिजिटल रजिस्टर, नौकरी अनुबंधों की ऑनलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम, और भारतीय कामगारों के लिए सुरक्षा बीमा योजना शामिल है।
इसके अलावा, हर एजेंट को अपने अनुबंधों की जानकारी इमिग्रेशन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। किसी भी एजेंसी के खिलाफ शिकायत मिलने पर विदेश मंत्रालय और श्रम मंत्रालय संयुक्त रूप से जांच कर सकेंगे।
सरकार का यह कदम न केवल फर्जीवाड़ों पर लगाम लगाने के लिए बल्कि “सेफ माइग्रेशन” (सुरक्षित प्रवासन) की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
भारत के लिए प्रवासी भारतीयों का महत्व
भारत विश्व का सबसे बड़ा प्रवासी जनसंख्या वाला देश है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1.8 करोड़ भारतीय नागरिक विदेशों में काम कर रहे हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों में है। ये प्रवासी भारतीय हर साल देश में अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा भेजते हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
लेकिन इसके साथ-साथ, बड़ी संख्या में भारतीय कामगार ठगी का शिकार भी बनते हैं। कई मामलों में उन्हें गलत वीज़ा, झूठे कॉन्ट्रैक्ट, या बंधुआ मजदूरी जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। सरकार के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में ऐसे 1,200 से अधिक फर्जी एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन पुराना कानून आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं था।
विदेश मंत्री का रुख स्पष्ट
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि “भारत सरकार अपने हर प्रवासी नागरिक की सुरक्षा और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। पुराने कानून अब बदलते वैश्विक रोजगार ढांचे के अनुरूप नहीं हैं, इसलिए हम नया इमिग्रेशन कानून लाने जा रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि नया कानून “सुरक्षित, पारदर्शी और मानवीय प्रवासन नीति” की दिशा में सरकार का संकल्प प्रदर्शित करेगा।
कानून में क्या होंगे बदलाव
नया कानून एजेंटों के लाइसेंस की समय-सीमा तय करेगा और बिना पंजीकरण के काम करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करेगा। फर्जी एजेंसी चलाने वालों पर ₹10 लाख तक जुर्माना और 7 साल तक की सजा हो सकती है।
इसके अलावा, सरकार हर राज्य में “इमिग्रेशन हेल्पडेस्क” स्थापित करेगी, जहां से प्रवासी कामगारों को परामर्श, कानूनी सहायता और हेल्पलाइन सेवाएं मिलेंगी। इससे उन लोगों को मदद मिलेगी जो विदेश जाने से पहले दस्तावेज़ी प्रक्रिया या कानूनी पेचिदगियों से अनजान रहते हैं।
डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की शुरुआत
नए कानून के तहत एक डिजिटल इमिग्रेशन मैनेजमेंट सिस्टम (DIMS) भी लागू किया जाएगा। इस सिस्टम के जरिए हर प्रवासी भारतीय का डेटा सुरक्षित रूप से दर्ज रहेगा और उसकी विदेश यात्रा, रोजगार और रिटर्न से जुड़ी जानकारी सरकार के पास उपलब्ध रहेगी। इससे धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों पर निगरानी रखना आसान होगा।
फर्जी एजेंटों पर शिकंजा
अब तक फर्जी एजेंट नकली वेबसाइट, फर्जी इंटरव्यू लेटर और झूठे अनुबंधों के जरिए लोगों को ठगते थे। नया कानून इन पर पूरी तरह से अंकुश लगाएगा। हर एजेंट को सरकारी रजिस्ट्री पोर्टल पर सत्यापित कराना अनिवार्य होगा और केवल उन्हीं के माध्यम से विदेश में नौकरी के अवसर दिए जा सकेंगे।
विशेषज्ञों की राय
रोजगार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को और मजबूत करेगा। प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा न केवल मानवीय दृष्टि से बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजी जाने वाली रेमिटेंस भारत की जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा है।
मोदी सरकार का यह निर्णय देश के लाखों युवाओं के लिए राहत की खबर है, जो बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जाते हैं। नया इमिग्रेशन कानून 2025 पुराने 1983 एक्ट की सीमाओं को समाप्त करेगा और प्रवासियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। आने वाले महीनों में यह कानून संसद में पेश किया जा सकता है और इसके लागू होने के बाद विदेश नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालों पर सख्त कार्रवाई संभव होगी।







