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  • नासिक जिले में जल-स्तर में बढ़ोतरी: मानसून के बाद पानी की कमी पर मिली राहत

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    नासिक। महाराष्ट्र के नासिक जिले में इस वर्ष मानसून के बाद भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। जिला भू-जल सर्वेक्षण एवं विकास एजेंसी (GSDA) की रिपोर्ट के अनुसार, नासिक जिले में औसतन 0.45 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी न केवल जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण इलाकों के लिए राहत की खबर है, बल्कि राज्य के जल प्रबंधन प्रयासों की सफलता को भी दर्शाती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ष मानसूनी बारिश औसत से अधिक रही, जिसके चलते भूमिगत जल भंडारों में पुनर्भरण हुआ। नासिक जिले के ड्योल्हा, मालेगांव, निफाड, बग्लान और सिन्हर तालुकों में भू-जल स्तर में सबसे अधिक सुधार देखा गया है। कुछ क्षेत्रों में यह वृद्धि 0.5 मीटर से भी ज्यादा रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय है।

    भू-जल सर्वेक्षण टीम के अधिकारी ने बताया कि जिले में कुल 500 से अधिक अवलोकन कुओं की निगरानी की गई। इनमें से 80 प्रतिशत कुओं में जल स्तर में बढ़ोतरी पाई गई, जबकि कुछ सीमित इलाकों में जल स्तर स्थिर रहा। नासिक शहर और उसके आस-पास के औद्योगिक इलाकों में भी जल स्तर में मामूली सुधार दर्ज किया गया है, जिससे स्थानीय जलापूर्ति व्यवस्था को भी लाभ मिला है।

    पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी केवल प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि सरकारी और स्थानीय स्तर पर किए गए वाटर हार्वेस्टिंग (Water Harvesting) और मृदा-संरक्षण कार्यों की वजह से भी संभव हुई है। ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों ने मिलकर जल संचयन परियोजनाएं चलाईं, जिनका परिणाम अब सामने आने लगा है।

    कृषि क्षेत्र में इसका सबसे बड़ा असर देखने को मिल रहा है। किसान अब रबी सीजन की तैयारियों में जुट गए हैं। निफाड के किसान संदीप शिंदे का कहना है कि, “पिछले साल हमें रबी सीजन में सिंचाई की भारी समस्या झेलनी पड़ी थी, लेकिन इस बार स्थिति बेहतर है। भू-जल बढ़ने से हमें फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।”

    GSDA के अधिकारी किरन कांबले ने कहा कि जिले में औसतन जलस्तर में वृद्धि का सीधा लाभ ग्रामीण इलाकों को मिलेगा। उन्होंने बताया कि “इस वर्ष अधिकांश क्षेत्रों में सितंबर और अक्टूबर तक बारिश जारी रही, जिससे भूमिगत जलाशयों को भरने में मदद मिली।”

    हालांकि विशेषज्ञों ने चेताया है कि यह सुधार स्थायी नहीं है। यदि भू-जल का अनियंत्रित दोहन जारी रहा तो स्थिति फिर से बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा कि उद्योगों और किसानों को माइक्रो-इरिगेशन (Micro-Irrigation) तकनीक अपनाने और वाटर रिचार्ज प्रोजेक्ट्स को स्थायी बनाने की दिशा में काम करना होगा।

    नासिक प्रशासन ने भी घोषणा की है कि आने वाले महीनों में जल संरक्षण को लेकर विशेष अभियान चलाया जाएगा। “हम वर्ष 2026 तक जिले के सभी ग्राम पंचायतों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं,” जिला कलेक्टर ने कहा।

    राज्य सरकार ने भी नासिक को ‘जल समृद्ध जिला’ बनाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में अब तक 250 से अधिक जलाशय और तालाबों का गहरीकरण किया गया है। इसके साथ ही नई पाइपलाइन परियोजनाएं और जल भंडारण योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं।

    भू-जल स्तर में यह वृद्धि न केवल किसानों के चेहरों पर मुस्कान लाई है बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी प्रदेश के लिए शुभ संकेत है। अगर इसी तरह जल संरक्षण और रिचार्ज प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में नासिक जिले को पानी की कमी से बड़ी राहत मिल सकती है।

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