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घरेलू उपकरण बनाने वाली दिग्गज कंपनी व्हर्लपूल इंडिया (Whirlpool India) अब बिकने की कगार पर है। अमेरिका की प्रतिष्ठित प्राइवेट इक्विटी फर्म एडवेंट इंटरनेशनल (Advent International) इस कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के बेहद करीब पहुंच गई है। इस डील को लेकर बातचीत अब अंतिम चरण में बताई जा रही है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ, तो इस साल के अंत तक यह सौदा फाइनल हो सकता है।
व्हर्लपूल इंडिया की बिक्री में कई बड़ी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी। इनमें मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज, हैवल्स इंडिया, और दिग्गज बायआउट ग्रुप्स जैसे केकेआर (KKR), टीपीजी (TPG), ईक्यूटी (EQT) और बैन कैपिटल (Bain Capital) शामिल थे। हालांकि, अब यह रेस लगभग खत्म हो चुकी है और एडवेंट इंटरनेशनल इसमें विजेता के रूप में उभरती दिख रही है।
डील के पीछे की बड़ी रणनीति
ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हर्लपूल कॉर्पोरेशन — जो कि व्हर्लपूल इंडिया की पैरेंट कंपनी है — अब अपनी ग्लोबल रणनीति में बदलाव कर रही है। कंपनी अपनी ऊर्जा और पूंजी को अमेरिका जैसे बड़े और मुनाफा देने वाले बाजारों में केंद्रित करना चाहती है। वहां कंपनी ब्लेंडर, कॉफी मेकर और किचनएड जैसे उच्च लाभ वाले उत्पादों पर ध्यान देने की योजना बना रही है।
भारत में, हालांकि, व्हर्लपूल का बिजनेस अभी भी मजबूत है, लेकिन कंपनी यहां से अपनी हिस्सेदारी घटाकर लागत में कटौती और पूंजी पुनर्गठन (Cost Optimization) करना चाहती है। यही कारण है कि उसने अपने भारतीय यूनिट में निवेशकों को हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया।
एडवेंट इंटरनेशनल खरीद सकती है 31% हिस्सेदारी
सूत्रों के अनुसार, एडवेंट इंटरनेशनल और व्हर्लपूल कॉर्पोरेशन के बीच बातचीत अंतिम दौर में है। यह फर्म व्हर्लपूल इंडिया में 31% हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रही है। इस सौदे के बाद, भारतीय नियमों के अनुसार, एडवेंट को 26% अतिरिक्त हिस्सेदारी के लिए ओपन ऑफर भी देना होगा। यदि यह ऑफर पूरी तरह से सब्सक्राइब हो जाता है, तो एडवेंट इंटरनेशनल कंपनी में कुल 57% हिस्सेदारी हासिल कर लेगी, यानी वह व्हर्लपूल इंडिया की बहुमत शेयरहोल्डर बन जाएगी।
रिलायंस और हैवल्स की दिलचस्पी क्यों खत्म हुई?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस और हैवल्स दोनों ने इस डील में शुरुआती दिलचस्पी तो दिखाई थी, लेकिन मूल्यांकन (Valuation) और रणनीतिक नियंत्रण के मसले पर सहमति नहीं बन सकी। रिलायंस पहले से ही उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट होम प्रोडक्ट्स में विस्तार कर रही है। ऐसे में कंपनी ने व्हर्लपूल के साथ संभावित तालमेल का आकलन किया था, लेकिन बाद में कदम पीछे खींच लिया।
वहीं, हैवल्स भी घरेलू उपकरण बाजार में पहले से मजबूत उपस्थिति रखती है और व्हर्लपूल के साथ जुड़ाव से अपने प्रोडक्ट रेंज को बढ़ाना चाहती थी। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों भारतीय कंपनियां इस डील की कीमत से संतुष्ट नहीं थीं, जिसके बाद उन्होंने रेस से बाहर निकलना उचित समझा।
एडवेंट का भारतीय बाजार में अनुभव
एडवेंट इंटरनेशनल का भारत में निवेश का लंबा अनुभव है। इससे पहले कंपनी ने डाबर हेल्थकेयर, मॉरिस गेराज (MG Motors), एवेन्यू सुपरमार्ट्स (DMart) और अन्य सेक्टरों में भी निवेश किया है। भारतीय बाजार में एडवेंट का उद्देश्य उपभोक्ता ब्रांड्स में निवेश करके दीर्घकालिक ग्रोथ पाना है।
अगर यह डील फाइनल होती है, तो यह भारत के उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र (Consumer Goods Sector) में इस साल की सबसे बड़ी निजी इक्विटी डील में से एक होगी। अनुमान है कि डील का मूल्य ₹6,000 से ₹8,000 करोड़ के बीच रह सकता है।
व्हर्लपूल इंडिया का प्रदर्शन और भविष्य
भारत में व्हर्लपूल के उत्पाद — जैसे रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव और किचनएड उपकरण — लंबे समय से भरोसेमंद ब्रांड की पहचान रखते हैं। कंपनी के देशभर में तीन बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं — पुणे, रंजनगांव और फरीदाबाद में।
हालांकि, हाल के वर्षों में स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण कंपनी की मार्केट शेयर और प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ा है। एडवेंट के निवेश से कंपनी को नई पूंजी, प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन और डिजिटल विस्तार की दिशा में नई ऊर्जा मिल सकती है।
व्हर्लपूल इंडिया की बिक्री भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। इससे एक ओर जहां अमेरिकी पैरेंट कंपनी अपने वैश्विक फोकस को पुनर्निर्धारित करेगी, वहीं एडवेंट इंटरनेशनल को भारतीय बाजार में एक मजबूत उपस्थिति मिलेगी।
यह सौदा न केवल भारत के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में हलचल मचाने वाला है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि आने वाले वर्षों में विदेशी निवेशक भारतीय घरेलू उपकरण बाजार को लेकर और भी सक्रिय होने वाले हैं।







