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भारत ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में सोशल-प्रोटेक्शन, जिसमें स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, जीवन बीमा, पेंशन योजनाएं और विभिन्न कल्याणकारी स्कीम्स शामिल हैं, का कवरेज बढ़कर अब 64 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। यह उपलब्धि इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2014 में यह कवरेज मात्र 19 प्रतिशत था। यानी पिछले 11 वर्षों में भारत ने सामाजिक सुरक्षा के दायरे को तीन गुना से भी अधिक बढ़ाकर करोड़ों नागरिकों को सुरक्षा का आधार प्रदान किया है।
भारत सरकार का दावा है कि यह उपलब्धि व्यापक और लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के कारण संभव हुई। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), आयुष्मान भारत–जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY), अटल पेंशन योजना (APY), श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सामाजिक सुरक्षा स्कीम्स और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही विभिन्न वेलफेयर योजनाओं ने इस वृद्धि में निर्णायक भूमिका निभाई है। इन योजनाओं ने विशेष रूप से निम्न-आय वर्ग, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी को बड़े पैमाने पर कवर किया।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज में यह उल्लेखनीय वृद्धि भारत को विश्व स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण स्थिति में खड़ा करती है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल आबादी के इतने बड़े हिस्से को सोशल-प्रोटेक्शन प्रदान करने वाले देशों में भारत, चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। यह उपलब्धि भारत की मानव विकास नीति और सामाजिक समावेशन की दिशा में की गई प्रगति को मजबूत रूप में दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ने से न केवल नागरिकों के आर्थिक जोखिम कम होते हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता भी बढ़ती है। स्वास्थ्य और दुर्घटना से जुड़े खर्चों में कमी आने से परिवारों पर बोझ घटता है और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पहली बार व्यापक सुरक्षा कवरेज मिला है। साथ ही, बुजुर्ग आबादी के लिए पेंशन योजनाओं का विस्तार एक महत्वपूर्ण सहारा साबित हो रहा है, जिससे वृद्धावस्था में आर्थिक निर्भरता कम हो रही है।
डिजिटल इंडिया अभियान और Jan Dhan–Aadhaar–Mobile (JAM) इंटीग्रेशन ने इन योजनाओं को देशभर में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से लाभ वितरण प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनी है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचा है। आने वाले वर्षों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा और विस्तार तथा डिजिटल ढांचे की मजबूती से यह कवरेज और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत की यह उपलब्धि न केवल उसके कल्याणकारी ढांचे को मजबूत बनाती है, बल्कि आर्थिक समावेशन और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम भी साबित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि भारत को एक अधिक सुरक्षित, स्थिर और समावेशी समाज की ओर ले जाती है, जहां हर नागरिक को सुरक्षा के बुनियादी ढांचे तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।








