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  • यूएस क़दम: भारत-चीन के लिए 500% टैरिफ की धमकी

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    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक नया कानून — ‘Sanctioning Russia Act of 2025’ — मंज़ूर किया है, जो उन देशों पर भारी शुल्क लगाने का प्रावधान करता है जो रूसी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात जारी रखते हैं। इस कानून के तहत भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देश जिनके निर्यात पर अमेरिकी सीमा शुल्क में 500% तक वृद्धि की अनुमति दी जा सकती है।

    क़ानून का लक्ष्य क्या है?

    संयुक्त राज्य अमेरिका इस कदम को ऐसे देशों को दंडित करने के लिए उठाना चाहता है जो सस्ते रूसी तेल का निरंतर व्यापार करते हैं, जिससे रूस को अपनी ऊर्जा बिक्री से लाभ मिलता है और वह युध्द से जुड़ी फंडिंग जारी रखता है, जैसा कि समर्थक सैनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया। इस बिल को बाइपार्टीज़न समर्थन का समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    500% तक टैरिफ का प्रावधान

    प्रस्तावित कानून के तहत यदि अमेरिका यह निर्धारित करता है कि किसी देश ने जानबूझकर रूसी मूल के पेट्रोलियम या यूरेनियम का व्यापार किया है, तो वह देश अमेरिका में अपने सभी उत्पादों पर कम से कम 500% तक के कस्टम ड्यूटी (टैरिफ) के अधीन हो सकता है। इससे भारत और चीन जैसे बड़े व्यापारिक भागीदारों पर बड़ा आर्थिक दबाव पड़ सकता है।

    भारत-अमेरिका व्यापार और ऊर्जा रणनीति पर असर

    यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदता रहा है। पहले अमेरिका ने 2025 में भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि भारत और अन्य देश रूसी तेल की खरीद जारी रखेंगे तो यह दंडात्मक कदम और तेज़ी से लागू किया जा सकता है।

    वैश्विक अर्थव्यवस्था और रिश्तों पर संभावित प्रभाव

    500% तक का टैरिफ न सिर्फ भारत-अमेरिका व्यापार सम्बन्धों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन, मूल्य वृद्धि और निर्यात-आयात रणनीतियों पर भी गहरा असर डाल सकता है। विशेषज्ञ इस बात पर भी ध्यान दे रहे हैं कि इतनी भारी दरें लागू होने पर भारत को अपने निर्यात बाजारों को विविध रूप से विकसित करने की आवश्यकता और भी बढ़ सकती है।

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