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जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सोमवार, 12 जनवरी 2026 को भारत पहुँचे, अपनी पहली आधिकारिक यात्रा (State Visit) के लिए, जो 12 से 13 जनवरी तक अहमदाबाद और बेंगलुरु में आयोजित की जा रही है। यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास निमंत्रण पर हुआ, और इसका लक्ष्य भारत‑जर्मनी के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है — विशेष रूप से आर्थिक, रक्षा, सुरक्षा, तकनीकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में।
आगमन और स्वागत
मर्ज को गांधीनगर के सड़र वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने औपचारिक रूप से स्वागत किया। जर्मनी और भारत इस वर्ष कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष तथा रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष मना रहे हैं, और दोनों देशों के बीच इस ऐतिहासिक मील‑पत्थर पर संवाद को और आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
साबरमती आश्रम में श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक कार्यक्रम
यात्रा के पहले दिन दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम का दौरा किया, जहाँ उन्होंने महात्मा गांधी को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और आश्रम के इतिहास को साझा किया। मर्ज ने आश्रम की विजिटर बुक पर गांधीजी के मूल्यों और आज के वैश्विक संदर्भ में उनके आदर्शों की अहमियत पर टिप्पणी भी लिखी।
इसके बाद दोनों ने साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव‑2026 में भाग लिया, जहाँ उन्होंने साथ मिलकर पतंग भी उड़ाई — यह क्षण भारत‑जर्मनी सांस्कृतिक कनेक्शन का प्रतीक माना गया।
रणनीतिक संवाद: व्यापार, सुरक्षा और साझेदारी
दो दिवसीय दौरे के दौरान बड़े पैमाने पर बैठकें और बातचीतें तय हैं, जिनमें भारत‑जर्मनी के रणनीतिक साझेदारी की उन्नति, व्यापार तथा निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा तथा कौशल विकास, डिफेंस और सुरक्षा सहयोग, हरित विकास और नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
बilateral trade और आर्थिक सहयोग पर बातचीत का जोर है — ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच व्यापार का आंकड़ा लगभग $50 बिलियन से अधिक तक पहुंच चुका है। सुरक्षा सहयोग पर भी मर्ज ने खास जोर दिया, और साथ ही जर्मन कंपनियों के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की जा रही है।
वैश्विक और क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य
मर्ज की यह यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी एशिया में पहली आधिकारिक यात्रा है और यह संकेत देती है कि भारत जर्मनी के लिए रणनीतिक भागीदार के रूप में कितना महत्व रखता है। दोनों देशों के नेताओं की बातचीत वैश्विक आर्थिक, तकनीकी तथा सुरक्षा संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगे की बैठकों में यूरोपीय संघ‑भारत मुक्त व्यापार समझौते (EU‑India FTA) पर भी बातचीत होने की संभावना है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक नया आयाम जुड़ सकता है।








