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  • नाशिक चुनाव: पूर्व पार्षदों के पास सक्रिय रूप से बढ़ी संपत्ति

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    नाशिक नगर निगम (NMC) के आगामी 15 जनवरी 2026 को होने वाले चुनावों से पहले चुनावी हलफनामों के आंकड़ों ने शहर की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। पिछले पांच से सात वर्षों के दौरान चुनाव लड़ रहे कई पूर्व पार्षदों की संपत्ति में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, लगभग 87 पूर्व पार्षदों ने अपने नामांकन पत्रों के साथ दाखिल किए गए हलफनामों में यह स्वीकार किया है कि उनकी कुल संपत्ति वर्ष 2017 की तुलना में कई गुना बढ़ चुकी है। यह आंकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि स्थानीय राजनीति में धन और सत्ता के बढ़ते प्रभाव को भी उजागर करते हैं।

     प्रमुख उम्मीदवारों की संपत्ति में बड़ा उछाल

    हलफनामों में दर्ज विवरण के अनुसार, कई दिग्गज और नए उम्मीदवारों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
    शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय चव्हाण की संपत्ति वर्ष 2017 में जहां लगभग ₹38.2 करोड़ थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब ₹74.1 करोड़ तक पहुंच गई है।

    इसी तरह, अजय बोरेस्टे की संपत्ति में भी भारी इजाफा हुआ है। उनकी कुल संपत्ति ₹6.6 करोड़ से बढ़कर ₹40.9 करोड़ हो गई है, जो कुछ ही वर्षों में कई गुना वृद्धि को दर्शाती है।

    इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा में नाम है भाजपा की दीपाली गीते का, जो पहली बार नगर निगम चुनाव लड़ रही हैं। उन्होंने अपने हलफनामे में ₹130.3 करोड़ की संपत्ति घोषित की है, जो इस बार के चुनाव में सबसे अधिक बताई जा रही है।

    भाजपा में शामिल कल्पना चुंभले की संपत्ति भी ₹19.6 करोड़ से बढ़कर ₹41.8 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं, शिवसेना के राहुल दिवे की संपत्ति में भी बड़ा बदलाव देखा गया है, जो ₹22 लाख से बढ़कर करीब ₹6 करोड़ हो चुकी है।

    इसके अलावा, दिनकर पाटिल और उनके पुत्र अमोल पाटिल की संपत्ति में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दिनकर पाटिल की संपत्ति ₹9.2 करोड़ से बढ़कर ₹17.4 करोड़ हो गई है, जबकि अमोल पाटिल की संपत्ति ₹56.6 लाख से बढ़कर ₹5 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इनके अलावा भी कई पूर्व पार्षदों ने करोड़ों रुपये की संपत्ति घोषित की है।

     चुनावी परिदृश्य में दौलत की भूमिका पर सवाल

    स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों की संपत्ति में इस तरह की तेज वृद्धि ने आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि राजनीतिक भागीदारी और आर्थिक संसाधनों के बीच संबंध लगातार मजबूत होता जा रहा है

    संपत्ति में इस असामान्य वृद्धि को लेकर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या बढ़ता आर्थिक सामर्थ्य चुनावी सफलता में निर्णायक भूमिका निभा रहा है और क्या इससे आम नागरिकों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। कई मतदाताओं का कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दे अब पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं।

     नाशिक नगर निगम चुनाव: एक नजर

    नाशिक नगर निगम चुनाव 15 जनवरी 2026 को आयोजित किए जाएंगे। इस चुनाव में कुल 122 सीटों के लिए 31 वार्डों में मतदान होगा। एक बार फिर कई पूर्व पार्षद और प्रमुख राजनीतिक चेहरे जनता के बीच जाकर समर्थन मांग रहे हैं। ऐसे में उम्मीदवारों की संपत्ति से जुड़े ये आंकड़े चुनावी माहौल को और भी रोचक व चर्चा-योग्य बना रहे हैं।

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