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आयरलैंड में आगे की पढ़ाई और काम की तलाश में जाने वाले भारतीय छात्रों के बीच सोशल मीडिया पर एक वायरल Reddit पोस्ट ने तहलका मचा दिया है, जिसमें एक भारतीय स्नातक ने नए छात्रों को “स्टूडेंट लोन लेकर यहाँ न आएं” की चेतावनी दी है। यह पोस्ट तेजी से साझा की जा रही है और इसके कारण कई छात्रों और अभिभावकों में चिंता की लहर दौड़ गई है।
क्या कहा वायरल पोस्ट में?
Reddit पर एक भारतीय ग्रेजुएट ने, जिन्होंने यूनीवर्सिटी ऑफ़ गॉलवे से 2025 में मास्टर्स किया था, लिखा कि उन्होंने लगभग 130 सहपाठियों के समूह का विश्लेषण किया, लेकिन केवल 15 छात्रों को ही तकनीकी (टेक) सेक्टर में नौकरी मिली। उनसे भी कोई भी वीज़ा‑स्पॉन्सरशिप तक नहीं मिला, जिससे स्थायी रूप से काम करना और रहना मुश्किल हो रहा है।
उन्होंने बताया कि 500 से अधिक पूर्व छात्र ने अपने वीज़ा की समाप्ति के बाद लौटकर भारत जाने का निर्णय लिया और आज भी कई छात्र अपना एजुकेशन लोन चुका पाने में असमर्थ हैं। यह स्थिति खासकर उन छात्रों के लिए गंभीर हो सकती है जो भारी लोन लेकर विदेश पढ़ाई का निर्णय लेते हैं।
नौकरी और वीज़ा स्पॉन्सरशिप की चुनौती
रेटिंग करने वाले छात्र ने कहा कि हाल ही में आयरलैंड में काम‑वीज़ा के लिए न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ाई गई है, जिसने गैर‑EU उम्मीदवारों के लिए नौकरी पाने को और अधिक कठिन बना दिया है। यह बदलाव नियोक्ताओं को वीज़ा स्पॉन्सरशिप देने में हिचकिचाहट पैदा कर रहा है, खासकर टेक सेक्टर में।
उन्होंने चेतावनी दी:
“अगर आप स्टूडेंट लोन लेकर यहाँ आते हैं, तो डिफ़ॉल्ट का खतरा बहुत अधिक है। 95% से अधिक गैर‑EU ग्रेजुएट को तीन वर्ष के भीतर आयरलैंड छोड़ना पड़ता है।”
भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या के बावजूद समस्या
हालांकि आयरलैंड में भारतीय छात्रों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है — 2024‑25 में भारत से नामांकन में लगभग 30% की वृद्धि दर्ज हुई, जिससे भारत सबसे बड़ा स्रोत देश बन गया है — इसके बावजूद नौकरी बाजार की वास्तविक चुनौती कुछ अलग ही तस्वीर पेश करती है।
आयरलैंड की अंग्रेज़ी‑माध्यम शिक्षा प्रणाली और पोस्ट‑स्टडी वर्क विकल्प ने पहले छात्रों को आकर्षित किया है, लेकिन नौकरी और वीज़ा बाधाएँ उन आकर्षणों को चुनौती दे रही हैं।








