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महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के बहमने गांव में डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। पहले यह गांव अपने पहाड़ी इलाके और कमजोर मोबाइल नेटवर्क के कारण ‘मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना’ की लाभार्थी महिलाओं के लिए ई‑केवाईसी पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। महिलाएं घंटों नेटवर्क आने का इंतजार करतीं या मोबाइल सिग्नल के लिए पेड़ पर चढ़तीं, जिससे कई बार उनका पंजीकरण अधूरा रह जाता।
अब, मोबाइल नेटवर्क सुधार के बाद स्थिति बदल गई है। बहमने गांव के लगभग 500 लाभार्थी महिलाओं को इस बदलाव से सीधे फायदा मिला है। उनका कहना है कि अब उन्हें ट्रेकिंग या पेड़ से मोबाइल लटकाने की जरूरत नहीं पड़ती और ई‑केवाईसी प्रक्रिया आसानी से समय पर पूरी हो जाती है। इस सुधार ने महिलाओं को योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के लेने में सक्षम बनाया है।
जिला प्रशासन ने मोबाइल सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय करते हुए टावर अपग्रेड की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसके परिणामस्वरूप बहमने गांव और आसपास के इलाके में नेटवर्क कवरेज मजबूत हुआ है। अधिकारीयों का कहना है कि इस सुधार से लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण अब डिजिटल रूप से जुड़े हैं और योजनाओं का लाभ समय पर ले पा रहे हैं।
लाभार्थी उषा पवारा ने बताया, “पहले हमें ई‑केवाईसी के लिए पहाड़ चढ़ना पड़ता था और नेटवर्क आने का इंतजार करना पड़ता था। अब मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध है, डाटा ट्रांसफर सही तरीके से हो रहा है और ओटीपी भी समय पर मिल रहा है। इससे हमारे लिए योजनाओं का लाभ लेना आसान हो गया है।”
यह बदलाव सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समावेशन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में नेटवर्क की कमी लंबे समय से योजनाओं के लाभार्थियों के लिए बाधा बनती रही है। अब डिजिटल सुविधा के विस्तार से महिलाएं और युवा सरकारी योजनाओं के तहत सीधे लाभ उठा सकते हैं।
इसके अलावा, स्वास्थ्य योजनाओं जैसे ‘आयुष्मान भारत’ के ई‑केवाईसी कार्य भी अब बिना रुकावट पूरे हो रहे हैं। अधिकारीयों के अनुसार, आने वाले समय में नेटवर्क सुधार और टावर अपग्रेड से सभी लाभार्थियों का 100 प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल समावेशन को मजबूत करती है और अन्य दूरदराज इलाकों में भी समान बदलाव की उम्मीद जगाती है। नेटवर्क और डेटा सुविधा मौजूद होने से डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी सीधे ग्रामीणों तक पहुंच सकेगा।
अंततः बहमने गांव में मोबाइल नेटवर्क में सुधार ने महिलाओं के लिए ई‑केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ समाज में डिजिटल सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है। यह साबित करता है कि यदि आधारभूत तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हों, तो सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
अब यह देखना बाकी है कि नेटवर्क सुधार के बाद पूरी लाभार्थी आबादी को ई‑केवाईसी और अन्य डिजिटल सेवाओं का लाभ कितनी आसानी से मिल पाता है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि नेटवर्क और डेटा की सुविधा लगातार बनी रहे, ताकि यह सुधार दीर्घकालिक रूप से प्रभावी हो।







