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Nashik से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे राज्य में चर्चा छेड़ दी है। एक नामी मल्टीनेशनल IT कंपनी में कार्यरत महिलाओं के साथ कथित रूप से छेड़छाड़, मानसिक उत्पीड़न और जबरन धार्मिक दबाव बनाए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में अब तक कुल 9 शिकायतों के आधार पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किए गए हैं और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह कंपनी Mumbai Naka क्षेत्र में स्थित है और यहां कथित तौर पर 2022 से लेकर 2026 तक इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। पीड़ितों में अधिकतर महिलाएं 18 से 26 वर्ष की आयु वर्ग की बताई जा रही हैं। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के कुछ कर्मचारियों और प्रबंधन से जुड़े लोगों द्वारा महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
तथ्यों के अनुसार, कुछ आरोपियों द्वारा महिलाओं पर विशेष धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए दबाव बनाने की बात सामने आई है। आरोप है कि उन्हें नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया, मांसाहारी भोजन करने के लिए कहा गया और उनकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इसके अलावा, कई मामलों में महिलाओं के साथ शारीरिक छेड़छाड़, अनुचित टिप्पणियां और निजी जीवन से जुड़े अपमानजनक सवाल पूछे जाने की भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
इस मामले में Mumbai Naka Police Station में कुल 9 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें से 8 महिलाएं और 1 पुरुष शिकायतकर्ता हैं। पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने, विनयभंग, धमकी देने और जबरन संबंध बनाने जैसे गंभीर आरोपों के तहत केस दर्ज किए हैं। कुछ मामलों में आरोपियों पर दबाव बनाकर धर्मांतरण कराने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया गया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह मामला 25 मार्च 2026 को पहली बार सामने आया, जिसके बाद से जांच एजेंसियों ने गुप्त रूप से जांच शुरू कर दी थी। जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए हैं, जिनमें सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरें भी शामिल हैं। इन तस्वीरों की सत्यता की जांच की जा रही है और इन्हें सबूत के रूप में परखा जा रहा है।
शिकायतों में दर्ज विभिन्न घटनाओं के अनुसार, आरोपियों द्वारा ऑफिस परिसर में ही महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की गई, उन्हें असहज महसूस कराया गया और कई बार उनके निजी जीवन पर टिप्पणी की गई। कुछ मामलों में HR विभाग को शिकायत देने के बावजूद उचित कार्रवाई न होने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण को लेकर कुछ जगहों पर “कॉर्पोरेट जिहाद” जैसे शब्दों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। पुलिस और जांच एजेंसियां इस मामले को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर देख रही हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जांच करने पर जोर दे रही हैं।
इस घटना ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्पोरेट सेक्टर में सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित करना कंपनियों की जिम्मेदारी है। इस तरह की घटनाएं न केवल पीड़ितों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय हैं।
पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी है, तो वह सामने आए। इसके लिए 112 हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है और यह भी आश्वासन दिया गया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
फिलहाल, SIT द्वारा इस मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
अंततः, नासिक की इस घटना ने कार्यस्थल पर सुरक्षा, महिला अधिकारों और संस्थागत जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को फिर से केंद्र में ला दिया है। जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी, लेकिन यह घटना निश्चित रूप से एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।








