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उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। जल्द ही अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों में वॉटर टैक्सी सेवा शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत श्रद्धालु और पर्यटक गंगा और सरयू जैसी पवित्र नदियों में आधुनिक नावों के जरिए सफर कर सकेंगे। यह परियोजना न केवल धार्मिक पर्यटन को गति देगी बल्कि राज्य के जल परिवहन तंत्र में भी ऐतिहासिक बदलाव लेकर आएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने लंबे समय से इस योजना पर काम किया है। हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई है। संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी तकनीकी और सुरक्षा मानकों के साथ इसे जल्द से जल्द लागू करें। वॉटर टैक्सी सेवा का उद्देश्य केवल यात्रा का नया साधन देना नहीं है, बल्कि यह पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को भी प्रोत्साहित करेगी।
परिवहन विभाग और पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयास से यह परियोजना “गंगा विलास” जैसी सफल जलयात्रा परियोजनाओं की तर्ज पर तैयार की जा रही है। वाराणसी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इस योजना का प्रमुख केंद्र होगा। यहां गंगा नदी पर घाटों के बीच छोटी नावों के जरिए यात्रियों को आने-जाने की सुविधा मिलेगी। इसी प्रकार अयोध्या में सरयू नदी पर राम की पैड़ी से लेकर नयाघाट और हनुमानगढ़ी तक वॉटर टैक्सी चलाने की योजना है।
अयोध्या में यह सेवा राम मंदिर के भव्य उद्घाटन और बढ़ते पर्यटक प्रवाह को देखते हुए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं, और ऐसे में वॉटर टैक्सी सेवा से न केवल यातायात दबाव कम होगा बल्कि सरयू नदी के तटों की सुंदरता का अनुभव भी श्रद्धालुओं को मिल सकेगा।
प्रयागराज में यह सेवा संगम क्षेत्र से लेकर छतनाग और झूंसी तक शुरू करने की योजना है। यहां हर साल कुंभ और माघ मेला जैसे बड़े आयोजन होते हैं, जिनमें करोड़ों लोग शामिल होते हैं। ऐसे में यह सेवा यात्रियों के आवागमन को सुगम बनाएगी और मेले के समय यातायात का भार भी कम करेगी।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वॉटर टैक्सी में अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाएं होंगी। हर नाव में जीवन रक्षक जैकेट, नेविगेशन सिस्टम, इमरजेंसी अलार्म और GPS ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टिकट बुकिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालु अग्रिम टिकट बुक कर सकेंगे।
सरकार ने इसके साथ ही नदी तटों पर मिनी जेट्टी (Jetty) और टर्मिनल पॉइंट्स विकसित करने की योजना भी बनाई है। इन स्थानों पर यात्रियों के लिए प्रतीक्षा कक्ष, पेयजल, शौचालय और कैफे जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके अलावा, नदी के किनारों पर पारंपरिक और सांस्कृतिक सौंदर्य को बनाए रखने के लिए पर्यावरण विभाग से विशेष अनुमति ली जा रही है।
योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह परियोजना न केवल सुरक्षित और आधुनिक हो बल्कि स्थानीय पहचान के अनुरूप भी दिखे। इसके तहत नावों की डिज़ाइन में उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली और धार्मिक प्रतीकों को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इससे यह केवल परिवहन साधन नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाएगा।
पर्यटन विभाग का अनुमान है कि इस सेवा के शुरू होने के बाद वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज में हर साल 15 से 20 प्रतिशत पर्यटक वृद्धि दर्ज की जा सकती है। खासतौर पर विदेशी पर्यटक जो भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक वैभव को नजदीक से देखना चाहते हैं, उन्हें यह अनुभव बेहद आकर्षक लगेगा।
सरकार इस परियोजना के तहत स्थानीय नाविकों और नौका संचालकों को भी प्रशिक्षित करेगी ताकि वे नई तकनीक के साथ कार्य कर सकें। इसके लिए वाराणसी में एक ‘रिवर ट्रांसपोर्ट ट्रेनिंग सेंटर’ स्थापित करने की योजना है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और पारंपरिक नौका संस्कृति को भी आधुनिक रूप में संजोया जा सकेगा।
राज्य सरकार ने इस वॉटर टैक्सी परियोजना के लिए केंद्र सरकार से भी सहयोग मांगा है। गंगा और सरयू नदियों में नेविगेशन की सुविधा के लिए ‘इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (IWAI) से तकनीकी मदद ली जाएगी। इसके अलावा, पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति मिलने के बाद पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह सेवा 2026 के आरंभ में शुरू की जा सकती है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। केरल, गोवा और मुंबई में पहले से वॉटर टैक्सी सेवाएं चल रही हैं, लेकिन धार्मिक नगरों में इसे शुरू करना एक अभिनव प्रयास है। यह न केवल उत्तर प्रदेश की धार्मिक पहचान को मजबूत करेगा बल्कि इसे “स्पिरिचुअल टूरिज्म कैपिटल” के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा।
वॉटर टैक्सी सेवा का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संयुक्त कार्यक्रम में किया जा सकता है। इस अवसर पर उम्मीद है कि केंद्र सरकार नई जल परिवहन नीतियों की घोषणा भी कर सकती है, जिससे नदियों का उपयोग पर्यटन और लॉजिस्टिक्स दोनों क्षेत्रों में बढ़ेगा।
अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज में वॉटर टैक्सी सेवा उत्तर प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली साबित होगी। यह पहल न केवल यात्रियों को सुविधा प्रदान करेगी बल्कि धार्मिक पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण — तीनों को एक साथ जोड़ने वाला एक अनूठा कदम है। गंगा और सरयू की लहरों पर तैरती ये आधुनिक नावें अब श्रद्धा और विकास की नई कहानी लिखने जा रही हैं।







