इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

अयोध्या एक बार फिर से इतिहास रचने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर 2025 को राम जन्मभूमि परिसर में आयोजित होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह समारोह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राम मंदिर निर्माण यात्रा के एक और गौरवपूर्ण अध्याय का प्रतीक भी बनेगा।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी राम मंदिर में 21 फीट ऊंचे ध्वज के ध्वजारोहण का शुभारंभ करेंगे। यह ध्वज श्रीराम की भव्यता, मर्यादा और भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक होगा। ध्वजारोहण समारोह के साथ ही मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार होंगे, जिसमें देशभर के प्रमुख संत-महंत और हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के अयोध्या दौरे को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। सुरक्षा एजेंसियों, उत्तर प्रदेश पुलिस, और विशेष सुरक्षा समूह (SPG) की टीमें शहर का निरीक्षण कर रही हैं। इस मौके पर अयोध्या को एक बार फिर सांस्कृतिक राजधानी के रूप में सजाया जाएगा। शहर के प्रमुख मार्गों, घाटों और मंदिरों को दीयों, फूलों और भगवा पताकाओं से सजाने की योजना बनाई जा रही है।
यह कार्यक्रम राम मंदिर के उद्घाटन के बाद आयोजित होने वाला पहला बड़ा धार्मिक आयोजन होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी फिर से अयोध्या को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ले आएगी। प्रधानमंत्री ने पहले भी अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के दौरान भूमि पूजन (5 अगस्त 2020) और प्राण प्रतिष्ठा (22 जनवरी 2024) जैसे ऐतिहासिक अवसरों में हिस्सा लिया था। अब ध्वजारोहण समारोह को उसी श्रृंखला का अगला अध्याय माना जा रहा है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि ध्वज निर्माण में विशेष ध्यान रखा गया है। यह कुंदनकारी रेशम और तांबे की जरी से निर्मित ध्वज होगा, जिसकी ऊंचाई 21 फीट और चौड़ाई 14 फीट होगी। इसमें भगवान श्रीराम का “अयोध्या अधिपति” स्वरूप अंकित किया गया है। ध्वजदंड को विशेष रूप से दक्षिण भारत के कारीगरों ने तांबे और पीतल की धातु से तैयार किया है, जो 100 वर्षों तक मौसम के प्रभाव से अडिग रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान अयोध्या के संत समुदाय और वैदिक विद्वान वैदिक अनुष्ठानों के साथ “राम रथ यात्रा” भी निकालेंगे। यह रथ यात्रा राम की पैड़ी से शुरू होकर मंदिर परिसर तक पहुंचेगी। मार्ग में “जय श्रीराम” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा।
अयोध्या प्रशासन ने बताया कि इस दिन शहर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम रहेंगे। पूरे अयोध्या को 5 सुरक्षा जोनों में बांटा जाएगा। हर जोन में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी। ड्रोन कैमरों से निगरानी होगी और मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए विशेष पास जारी किए जाएंगे।
ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिवहन विभाग ने अतिरिक्त बसें और विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। रेलवे ने पहले ही फैजाबाद और अयोध्या कैंट स्टेशनों पर प्लेटफार्मों के विस्तार और यात्रियों की भीड़ प्रबंधन के निर्देश दिए हैं।
पर्यटन विभाग ने भी इस अवसर को देखते हुए ‘राम नगरी दर्शन यात्रा’ नामक एक विशेष यात्रा योजना की घोषणा की है। इसके तहत श्रद्धालु एक ही टिकट पर हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल, और राम मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों का दर्शन कर सकेंगे। यह योजना 25 नवंबर से प्रारंभ होकर पूरे सप्ताह चलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में कई केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति की भी संभावना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आयोजन की भव्यता में कोई कमी न रहे। उन्होंने कहा कि यह दिन भारत की “आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक गौरव” का प्रतीक बनेगा।
अयोध्या में होटल और धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं की भारी बुकिंग शुरू हो चुकी है। शहर के प्रमुख घाटों पर सफाई, सजावट और लाइटिंग का कार्य तेज़ी से चल रहा है। नगर निगम ने घोषणा की है कि 25 नवंबर की रात को अयोध्या में 12 लाख दीये जलाकर एक बार फिर ‘दीपोत्सव’ जैसा दृश्य बनाया जाएगा।
विशेष बात यह है कि इस आयोजन के लिए डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग किया जाएगा। सूचना विभाग और दूरदर्शन इस पूरे समारोह का लाइव प्रसारण करेगा ताकि देश और विदेश में बैठे करोड़ों रामभक्त इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन सकें।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाला होगा। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक और सशक्त कदम के रूप में देखी जा रही है।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, ध्वजारोहण के बाद मंदिर परिसर में “राम राज्य महोत्सव” का आयोजन भी होगा, जिसमें विभिन्न राज्यों के कलाकार लोकनृत्य, संगीत और रामायण-आधारित प्रस्तुतियां देंगे। यह महोत्सव एक सप्ताह तक चलेगा और पर्यटकों के लिए खुला रहेगा।
अयोध्या के संतों ने इस आयोजन को “धर्म की विजय और राष्ट्र की मर्यादा” का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा का केंद्र है — जहां श्रद्धा, संस्कृति और संकल्प एक साथ जुड़ते हैं।
25 नवंबर 2025 का दिन अयोध्या के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में 21 फीट ऊंचे ध्वज का ध्वजारोहण करेंगे। यह आयोजन भारत की आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता का संगम होगा। एक बार फिर अयोध्या जगमगाएगी — विश्वास, विकास और वैभव के दीपों से।







