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बिहार के जहानाबाद जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। काको प्रखंड में कार्यरत एक डाटा ऑपरेटर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। यह मामला जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोपी ने आवेदक से ₹15,000 की घूस मांगी थी।
जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार डाटा ऑपरेटर का नाम सतीश कुमार है, जो काको प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित था। सतीश ने खालिसपुर निवासी नीरज कुमार से उनकी जमीन के दाखिल-खारिज के लिए ₹15,000 की रिश्वत की मांग की थी। इस मांग से परेशान होकर नीरज कुमार ने निगरानी विभाग, पटना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की जांच के दौरान निगरानी विभाग ने मामले की पुष्टि की और फिर सटीक योजना के तहत गुरुवार को कार्रवाई की।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, निगरानी टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए एक ट्रैप प्लान तैयार किया। इसके तहत शिकायतकर्ता नीरज कुमार को ₹3,000 की पहली किस्त देने को कहा गया। जैसे ही सतीश कुमार ने यह रकम ली, टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। गिरफ्तार करने के बाद टीम ने उससे पूछताछ की और उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले जाया गया।
निगरानी विभाग के डीएसपी ने बताया कि “आरोपी से प्राथमिक पूछताछ की जा रही है। फिलहाल उसे पटना लाया गया है, जहां उससे और भी मामलों की जानकारी जुटाई जाएगी। अगर जांच में और नाम सामने आते हैं, तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।”
इस पूरी कार्रवाई के दौरान प्रखंड कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया। वहां मौजूद कर्मचारियों और आम लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया कि किस तरह सरकारी कार्यों में आम जनता से खुलेआम रिश्वत मांगी जा रही थी।
शिकायतकर्ता नीरज कुमार ने बताया कि “मैं फरवरी माह से अपने जमीन के दाखिल-खारिज के लिए चक्कर काट रहा था। सतीश कुमार बार-बार पैसे की मांग कर रहा था। मजबूर होकर मैंने निगरानी विभाग में इसकी शिकायत दर्ज कराई। विभाग ने मेरी बात को गंभीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई की, जिससे मुझे न्याय मिला।”
स्थानीय लोगों ने निगरानी विभाग की इस कार्रवाई की खुलेआम सराहना की है। लोगों का कहना है कि ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों की वजह से आम जनता को सरकारी कार्य करवाने में काफी परेशानी होती है। कई गरीब किसान और मजदूर अपने छोटे-छोटे सरकारी कामों के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं।
काको प्रखंड में यह घटना कोई नई नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां राजस्व और भूमि सुधार से जुड़ी फाइलों में देरी और रिश्वतखोरी की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। अक्सर ऐसे मामलों में छोटे कर्मचारी लोगों से पैसे लेकर काम आगे बढ़ाने की बात करते हैं।
यह मामला जिले में एक सप्ताह के भीतर निगरानी विभाग की दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले भी जिले के एक अन्य प्रखंड में एक राजस्व कर्मचारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से सरकारी कर्मचारियों में भय का माहौल है और आम जनता में संतोष की भावना दिख रही है।
स्थानीय समाजसेवी और अधिवक्ता वर्ग का कहना है कि बिहार में अब भी निचले स्तर पर भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या बनी हुई है। जब तक सरकारी दफ्तरों में डिजिटल पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय नहीं की जाएगी, तब तक ऐसे मामले पूरी तरह खत्म नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि निगरानी विभाग की त्वरित कार्रवाई एक सकारात्मक कदम है, लेकिन साथ ही सरकार को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों के छोटे-छोटे कार्य बिना किसी दलाल या रिश्वत के पूरे हों।
काको और आस-पास के इलाकों के लोगों ने इस कार्रवाई के बाद राहत की सांस ली है। कई लोगों ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां अगर लगातार होती रहें, तो सरकारी दफ्तरों में बैठे भ्रष्ट कर्मचारियों को सबक मिलेगा। एक स्थानीय दुकानदार ने कहा, “सरकार अगर इसी तरह निगरानी विभाग को सक्रिय रखे, तो जनता को बहुत राहत मिलेगी।”







