• Create News
  • ▶ Play Radio
  • मुंबई में साइबर ठगी का नया तरीका: बुजुर्ग दंपति से 1.7 करोड़ की ठगी, फर्जी सरकारी दस्तावेज़ और व्हाट्सएप ग्रुप बने हथियार

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    देश की आर्थिक राजधानी में साइबर अपराधियों ने एक और खतरनाक तरीका अपनाते हुए एक बुजुर्ग दंपति से 1.7 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने सरकारी दस्तावेज़ों और व्हाट्सएप ग्रुप्स का इस्तेमाल कर इस फ्रॉड को अंजाम दिया। यह मामला न केवल साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ठग अब किस तरह “डिजिटल विश्वसनीयता” का इस्तेमाल लोगों को फंसाने के लिए कर रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार, ठगी का शिकार हुए दंपति साउथ मुंबई के प्रतिष्ठित इलाके में रहते हैं। ठगों ने खुद को सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और उसमें कुछ “आधिकारिक दिखने वाले” दस्तावेज़ साझा किए। इन दस्तावेजों में सरकारी लोगो, मुहर और हस्ताक्षर तक मौजूद थे, जिससे दंपति को उन पर विश्वास हो गया।

    इसके बाद ठगों ने पीड़ितों को बताया कि उनके बैंक खाते एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में संदिग्ध हैं और उन्हें क्लियरेंस के लिए कुछ रकम जमा करनी होगी। डर और भ्रम के माहौल में दंपति ने अपने बैंक खातों से धीरे-धीरे 1.7 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब तक उन्हें ठगी का एहसास हुआ, तब तक पैसा कई फर्जी खातों के ज़रिए गायब हो चुका था।

    मुंबई साइबर पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि ठगों ने एक संगठित गैंग की तरह काम किया। उन्होंने सरकारी नामों का दुरुपयोग करते हुए “जांच”, “कानूनी कार्रवाई” और “खाते सीज़” जैसी धमकियों से दंपति को मानसिक रूप से दबाव में रखा। इसके लिए ठगों ने एक ऐसा व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जिसमें फर्जी “अधिकारी” और “वकील” तक शामिल थे, जो ग्रुप में सरकारी भाषा में बात करते थे ताकि पूरा माहौल असली लगे।

    साइबर पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस फ्रॉड में ठगों ने “डीप फेक डॉक्यूमेंट्स” और “एआई बेस्ड इमेज एडिटिंग” का इस्तेमाल किया था। इससे सरकारी दस्तावेज़ों की नकल इतनी असली लग रही थी कि किसी आम व्यक्ति के लिए उन्हें पहचानना लगभग असंभव था।

    पुलिस का मानना है कि यह गैंग अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही हो सकती है, क्योंकि पैसे जिन खातों में गए हैं, वे अलग-अलग राज्यों और देशों में स्थित हैं। पुलिस ने बैंक खातों को ट्रेस करने और डिजिटल फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कैसे तकनीक के ज़रिए भरोसे का दुरुपयोग किया जा रहा है। खासतौर पर व्हाट्सएप, जो परिवार और दोस्तों से जुड़ने का माध्यम है, अब अपराधियों के लिए भी एक आसान टूल बन गया है।

    साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अब ठग सिर्फ फोन कॉल या ईमेल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए “मनोवैज्ञानिक जाल” बुनते हैं। वे पीड़ित के डर, लालच या असमंजस का फायदा उठाकर उसे वित्तीय जाल में फंसा लेते हैं।

    मुंबई पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा सरकारी नाम का हवाला देकर व्हाट्सएप या फोन पर पैसे मांगने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। साथ ही किसी भी अज्ञात लिंक, दस्तावेज़ या ग्रुप में शामिल होने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करें।

    इस घटना के बाद कई साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को सरकारी प्रतीकों और लोगो के इस्तेमाल पर नियंत्रण सख्त करना चाहिए। इससे फर्जी पहचान का दुरुपयोग रोका जा सकेगा।

    यह मामला इस बात का प्रतीक है कि डिजिटल युग में सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी जागरूकता है। हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि आज ठगों के पास न केवल तकनीकी साधन हैं, बल्कि मनोवैज्ञानिक चालें भी।

    मुंबई का यह मामला एक चेतावनी है — फर्जी दस्तावेज़ और “ऑफिशियल दिखने वाले” व्हाट्सएप ग्रुप अब नए हथियार बन चुके हैं। इसलिए, कोई भी संदेश या कॉल जो सरकारी नाम पर पैसे मांगे, उस पर भरोसा करने से पहले दो बार सोचें।

  • Related Posts

    बागलाण: पवन रामदास काकुळते ने शिक्षा के क्षेत्र में रची नई पहचान, ‘ध्येय क्लास’ बना सफलता का केंद्र

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन पवन रामदास काकुळते ने…

    Continue reading
    नाशिक: Ishita Packwell Industries के जरिए सौरभ देशमुख ने पैकेजिंग इंडस्ट्री में बनाई मजबूत पहचान

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग इंडस्ट्री में जहां गुणवत्ता और विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है, वहीं सौरभ देशमुख ने Ishita Packwell Industries…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *