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भारत की राजधानी एक बार फिर संस्कृति और सृजन के रंगों में रंग उठी है। मुंबई के प्रतिष्ठित नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (NCPA) ने अपने प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव ‘एनसीपीए द पार्क’ का दिल्ली में शानदार डेब्यू किया है। इस कला और संस्कृति के महोत्सव का आयोजन ऐतिहासिक त्रावणकोर पैलेस में किया गया, जहां देशभर के जाने-माने कलाकारों, संगीतकारों और नर्तकों ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया।
एनसीपीए, जो अब तक मुंबई में परफॉर्मिंग आर्ट्स का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, ने इस फेस्टिवल के ज़रिए दिल्ली में अपनी सांस्कृतिक उपस्थिति दर्ज कराई है। यह आयोजन राजधानी के कला प्रेमियों के लिए एक अनोखा अनुभव साबित हुआ, जिसमें संगीत, नृत्य, थिएटर, और दृश्य कला का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद एक शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति ने वातावरण को सुरों से भर दिया। इसके बाद कथक और भरतनाट्यम की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गहराई और सौंदर्य से परिचित कराया।
‘एनसीपीए द पार्क’ की इस दिल्ली संस्करण की खास बात यह रही कि इसमें नए और युवा कलाकारों को भी मंच मिला। आयोजकों का मानना है कि यह पहल कला को केवल अनुभवी कलाकारों तक सीमित न रखकर अगली पीढ़ी के रचनाकारों के लिए भी अवसर का द्वार खोलती है।
फेस्टिवल में थिएटर की दुनिया से भी शानदार प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। समाजिक मुद्दों, मानवीय संबंधों और समकालीन जीवन पर आधारित नाटकों ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया। कई प्रस्तुतियों में डिजिटल टेक्नोलॉजी और पारंपरिक कला का संयोजन देखा गया, जिससे यह फेस्टिवल आधुनिकता और परंपरा के बीच पुल का काम करता नजर आया।
एनसीपीए के चेयरमैन ने उद्घाटन समारोह में कहा,
“हम मानते हैं कि कला किसी एक शहर या समुदाय की नहीं होती। यह साझा अनुभव और संवाद का माध्यम है। दिल्ली में ‘एनसीपीए द पार्क’ शुरू करना हमारे लिए सिर्फ विस्तार नहीं, बल्कि भारतीय कला परंपरा को एक नए दर्शक वर्ग से जोड़ने का प्रयास है।”
त्रावणकोर पैलेस को इस फेस्टिवल के लिए विशेष रूप से सजाया गया था। इसके हरे-भरे प्रांगण और ऐतिहासिक वास्तुकला ने आयोजन को शाही और सांस्कृतिक आभा दी। शाम होते ही पैलेस का माहौल रोशनी, संगीत और तालियों से गूंज उठा।
इस फेस्टिवल में भारतीय शास्त्रीय कला के साथ-साथ फ्यूज़न परफॉर्मेंस और आधुनिक संगीत प्रस्तुतियां भी रहीं। युवा बैंड्स और सोलो आर्टिस्ट्स ने समकालीन भारतीय संगीत की नई दिशा को सामने रखा। कई कलाकारों ने पर्यावरण, स्त्री सशक्तिकरण और शांति जैसे सामाजिक विषयों को अपने प्रदर्शन का हिस्सा बनाया, जिससे कला सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक संदेश देने का माध्यम भी बनी।
दिल्ली के कला प्रेमियों ने एनसीपीए के इस आयोजन का गर्मजोशी से स्वागत किया। बड़ी संख्या में दर्शक त्रावणकोर पैलेस पहुंचे और उन्होंने इसे “सांस्कृतिक पुनर्जागरण” की संज्ञा दी। सोशल मीडिया पर भी फेस्टिवल के वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें दर्शक उत्सव की भव्यता की तारीफ करते दिख रहे हैं।
फेस्टिवल के दौरान ‘Art for All’ नामक एक विशेष पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें जाने-माने कलाकारों, क्यूरेटरों और सांस्कृतिक विचारकों ने भारत में परफॉर्मिंग आर्ट्स के भविष्य पर अपने विचार साझा किए। इसमें कला को शिक्षा और तकनीक से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
एनसीपीए की यह पहल न केवल दिल्ली बल्कि पूरे उत्तर भारत में कला के प्रति नई ऊर्जा का संचार करने वाली है। आने वाले वर्षों में एनसीपीए की योजना है कि देश के अन्य प्रमुख शहरों — जैसे कोलकाता, जयपुर और बेंगलुरु — में भी इस तरह के बहुआयामी कला उत्सव आयोजित किए जाएं।
त्रावणकोर पैलेस में हुआ यह आयोजन इस बात का प्रतीक बन गया कि भारत की कला परंपरा केवल इतिहास में नहीं, बल्कि आज के युग में भी उतनी ही जीवंत और प्रासंगिक है। दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में ‘एनसीपीए द पार्क’ का आगमन निश्चित रूप से एक नई शुरुआत है — एक ऐसी शुरुआत जो रचनात्मकता, संवाद और भारतीयता के रंगों से सजी है।







