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मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव क्षेत्र में स्थित बिलाावर कला गांव के एक सरकारी स्कूल में धर्मांतरण के दबाव का गंभीर मामला सामने आया है। कक्षा 10वीं और 12वीं के कई छात्रों ने शिक्षिका सीमा मैथ्यूज और छात्रावास अधीक्षक नरेंद्र उईके के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि कक्षा में उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस शिकायत के सामने आते ही पुलिस और शिक्षा विभाग हरकत में आ गए हैं और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
मंगलवार को छात्रों द्वारा लिखित शिकायत जुन्नारदेव थाने में सौंपी गई। छात्रों का कहना है कि शिक्षिका कक्षा में लगातार ईसाई धर्म से जुड़ी बातें बताती हैं और उन्हें हिंदू रीति-रिवाजों से दूर रहने की सलाह देती हैं। छात्रों ने दावा किया कि आदिवासी छात्रों पर विशेष रूप से दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपनी ‘पुरानी परंपराओं’ को छोड़ दें। छात्रों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से चल रही थी, लेकिन अब जाकर उन्होंने हिम्मत जुटाकर इसकी शिकायत की।
क्लास में ईसाई धर्म की बातें बताने का आरोप
शिकायत में छात्रों ने उल्लेख किया कि कक्षा के दौरान शिक्षिका ईसाई धार्मिक शिक्षाओं का जिक्र करती थीं और बातचीत का विषय अक्सर धर्मांतरण तक पहुंच जाता था। उनका आरोप है कि शिक्षिका बार-बार उन्हें नई धार्मिक आस्थाएं अपनाने के लिए प्रेरित करती थीं, जिससे छात्र असहज हो जाते थे। कुछ छात्रों ने कहा कि शिक्षक ने कई बार यह बात दोहराई कि उन्हें अपने पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों और मान्यताओं से दूरी बना लेनी चाहिए।
छात्रावास अधीक्षक नरेंद्र उईके पर भी छात्रों ने आरोप लगाया है कि वे इस पूरी गतिविधि के दौरान चुप रहे और छात्रों की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद छात्रों ने सामूहिक रूप से शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मामले की शिकायत मिलते ही प्रशासन सक्रिय
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। जुन्नारदेव थाना प्रभारी ने कहा है कि छात्रों की शिकायत गंभीर है, इसलिए मामले की तहकीकात की जा रही है। पुलिस छात्रों, स्टाफ और संबंधित शिक्षिका के बयान दर्ज कर रही है। साथ ही, शिक्षा विभाग को भी मामले की जानकारी दी गई है और विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को परखा जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शिकायत के चलते टीम स्कूल का निरीक्षण करेगी और छात्रों से अलग-अलग बातचीत कर वास्तविक स्थिति को समझने का प्रयास किया जाएगा।
स्थानीय लोगों में चिंता, माता-पिता ने जताई नाराजगी
घटना सामने आने के बाद गांव के कुछ अभिभावक भी स्कूल पहुंचे और छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों पर अपनी चिंता जताई। उनका कहना है कि स्कूल शिक्षा का स्थान है, जहां बच्चों को ज्ञान और संस्कार दिए जाते हैं, न कि किसी भी प्रकार के धार्मिक प्रभाव का दबाव। अभिभावकों ने मांग की है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
फिलहाल मामला जांच के अधीन है और प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही कोई ठोस कार्रवाई संभव होगी। पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों स्तर पर जांच चल रही है, ताकि मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सके।
छात्रों की शिकायत ने जिले में एक गंभीर चर्चा छेड़ दी है और लोग प्रशासन की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि आरोप कितने सही हैं और किन परिस्थितियों में यह विवाद सामने आया।








